क्या बिजली के तारों की भी एक्सपायरी डेट होती है? सस्ते के चक्कर में पुरानी केबल खरीदने की भारी भूल!


 ​जब हम खाने-पीने का सामान या दवाइयां खरीदते हैं, तो सबसे पहले पैकेट पर उसकी 'एक्सपायरी डेट' या 'मैन्युफैक्चरिंग डेट' चेक करते हैं। लेकिन जब बात घर की नसों यानी बिजली के तारों (Electric Wires) की आती है, तो ग्राहक सिर्फ ब्रांड का नाम और भारी डिस्काउंट देखकर खुश हो जाते हैं।

​अक्सर मार्केट में कुछ जगह ब्रांडेड तार भी 20% से 30% सस्ते रेट पर मिल जाते हैं, और ग्राहक इसे अपनी बचत समझ बैठते हैं। जबकि हकीकत यह होती है कि वे कई साल पुराना (Dead Stock) माल खरीद रहे होते हैं जिसकी शेल्फ लाइफ और इंसुलेशन क्षमता खत्म हो चुकी होती है।

​अगर एक्सपायरी का महत्व नहीं होता, तो कंपनियां मैन्युफैक्चरिंग डेट और बैच क्यों डालती हैं?

​कंपनियां हर बंडल पर निर्माण की तारीख (Date of Manufacturing) सिर्फ औपचारिकता के लिए नहीं लिखतीं, बल्कि इसके पीछे गहरा वैज्ञानिक कारण होता है:

​PVC इंसुलेशन की सीमित लाइफ: तांबा भले ही सालों-साल चले, लेकिन उसके ऊपर चढ़ा PVC (प्लास्टिक कोटिंग) समय के साथ अपनी लचक (Elasticity) खो देता है।

​केमिकल का सूखना: इंसुलेशन को लचीला और फायर-प्रूफ (FR/FRLS) बनाए रखने के लिए उसमें प्लास्टिसाइज़र केमिकल्स मिलाए जाते हैं। गोदामों में सालों तक रखे-रखे यह केमिकल सूख जाता है।

​ऑक्सीडेशन (Oxidation): सालों पुराने रखे तारों के अंदर हवा की नमी से तांबे पर काली/हरी परत जमने लगती है, जिससे उसकी करंट ले जाने की क्षमता घट जाती है।

​पुराने और एक्सपायरी के करीब पहुंचे तार लगाने के 4 बड़े नुकसान

​दीवारों के अंदर ही इंसुलेशन का चटकना: जब 4-5 साल पुराने रखे तार को पाइप के अंदर मोड़ा जाता है, तो सूखा हुआ PVC बीच से चटक (Crack) जाता है। इससे दीवारों में करंट फैलने का खतरा बन जाता है।

​फायर-प्रूफ (FR) कोटिंग का बेअसर होना: नया FRLS तार आग लगने पर धुआं कम करता है और आग को फैलने नहीं देता। लेकिन पुराना तार अपनी यह क्षमता खो चुका होता है और स्पार्किंग होते ही तेजी से आग पकड़ लेता है।

​वोल्टेज ड्रॉप और बिजली का भारी बिल: तार के तांबे में जंग/ऑक्सीडेशन होने से रेजिस्टेंस (रुकावट) बढ़ जाता है। तार गर्म होने लगता है और आपका बिजली का बिल हर महीने बिना वजह ज्यादा आता है।

​शॉर्ट सर्किट और बार-बार फॉल्ट: दीवारों में थोड़ी सी भी सीलन आते ही कमजोर इंसुलेशन करंट को रोक नहीं पाता और मेन MCB बार-बार ट्रिप होने लगती है।

​तार खरीदते समय ग्राहक किन बातों का ध्यान रखें?

​पैकेट पर मैन्युफैक्चरिंग डेट जरूर देखें: कोशिश करें कि तार 6 महीने से 1 साल के भीतर का बना हो।

​हद से ज्यादा सस्ते डिस्काउंट से सावधान रहें: अगर कोई दुकानदार नामी ब्रांड के तार को असामान्य रूप से सस्ते में दे रहा है, तो समझ जाएं कि वह पुराना या डंप स्टॉक खाली कर रहा है।

​तार की लचक परखें: तार को उंगली पर लपेटकर देखें; अगर उसका इंसुलेशन सफेद पड़ रहा है या चटक रहा है, तो वह पुराना और सूखा हुआ माल है।

​हमेशा अधिकृत और भरोसेमंद दुकान से ही खरीदें: जहां स्टॉक रोटेशन रेगुलर हो और आपको फ्रेश लॉट का माल मिले।

​घर की वायरिंग कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे हर दो साल में बदला जा सके। यह 20-25 साल का निवेश है। थोड़े से डिस्काउंट के लालच में पुराने स्टॉक का तार खरीदकर अपने पूरे परिवार और आशियाने को खतरे में न डालें।

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