Copper vs Aluminium Wire: घर की वायरिंग में एल्युमिनियम तार कहाँ इस्तेमाल करें और कहाँ सिर्फ कॉपर? जानिए सही नियम

 मकान या दुकान की वायरिंग करवाते समय सबसे बड़ा सवाल बजट और तार के प्रकार को लेकर उठता है। बाज़ार में कॉपर (तांबा) का तार एल्युमिनियम के तार की तुलना में 3 से 4 गुना महंगा आता है। पैसे बचाने के चक्कर में कई लोग पूरे घर में एल्युमिनियम तार डलवाने की सोच लेते हैं, जबकि कुछ लोग पोल से मीटर तक भी महंगा कॉपर खींच लेते हैं।

​बिजली के नियमों और सुरक्षा के अनुसार एल्युमिनियम तार कहाँ इस्तेमाल करना पूरी तरह सुरक्षित है और किन जगहों पर सिर्फ कॉपर तार ही लगाना चाहिए? आइए इसे बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं।

​1. कॉपर (तांबा) तार के फायदे और मुख्य इस्तेमाल

​कॉपर बिजली का सबसे बेहतरीन सुचालक (Good Conductor) है।

​लचीलापन और मजबूती: कॉपर का तार मुड़ने पर जल्दी टूटता नहीं है और लंबे समय तक चलता है।

​कम हीटिंग (Less Heat): तांबे के तार में करंट का प्रतिरोध (Resistance) बहुत कम होता है, जिससे तार गर्म नहीं होता और बिजली की बर्बादी नहीं होती।

​कहाँ सिर्फ कॉपर ही लगाना चाहिए:

​घर के अंदर की पूरी अंडरग्राउंड दीवार वाली वायरिंग।

​पंखे, लाइट, टीवी और मॉड्युलर स्विच बोर्ड के कनेक्शन।

​एसी, गीजर, पानी की मोटर और फ्रिज के पावर सॉकेट्स।

​इन्वर्टर और बैटरी के कनेक्शन केबल।

​2. एल्युमिनियम तार के फायदे और सही इस्तेमाल

​एल्युमिनियम वजन में हल्का और कीमत में बहुत सस्ता होता है।

​कहाँ एल्युमिनियम तार लगाना सबसे समझदारी है:

​बिजली के खंभे (Pole) से घर के मीटर तक की सर्विस लाइन: यहाँ 2-कोर या 4-कोर का 10 sq mm या 16 sq mm का आर्मर्ड एल्युमिनियम केबल लगाना सबसे किफायती और सुरक्षित होता है।

​मीटर से मेन डिस्ट्रीब्यूशन बॉक्स (MCB DB) तक की मुख्य लाइन (Main Cable): अगर मेन केबल की दूरी 50 से 100 फीट है, तो 6mm या 10mm का एल्युमिनियम केबल आसानी से लगाया जा सकता है।

​खेतों की मोटर या ट्यूबवेल तक लंबी दूरी की लाइन: जहां 200 से 500 मीटर दूर लाइन ले जानी हो, वहां भारी लागत से बचने के लिए एल्युमिनियम केबल ही सबसे बेस्ट रहता है।

​अस्थाई कनेक्शन: शादी-ब्याह, पंडाल या निर्माण कार्य (Construction site) के दौरान।

​3. घर के अंदर एल्युमिनियम तार न लगाने के 3 बड़े कारण

​तार का टूटना और ढीला होना (Loose Connection): एल्युमिनियम तार सख्त होता है। स्विच बोर्ड के पेंच (Screws) कसते समय यह बहुत जल्दी कट जाता है या कुछ समय बाद ढीला हो जाता है, जिससे स्पार्किंग शुरू हो जाती है।

​ऑक्सीडेशन (जंग लगना): हवा और नमी के संपर्क में आते ही एल्युमिनियम के ऊपर सफेद रंग की पपड़ी (Oxidation) जम जाती है, जिससे करंट का प्रवाह रुक जाता है और सॉकेट जल जाता है।

​आग का खतरा: एसी या गीजर जैसे भारी लोड पर पतला एल्युमिनियम तार तुरंत पिघल जाता है।

​4. इलेक्ट्रीशियन और मकान मालिक के लिए 3 ज़रूरी सावधानियां

​कॉपर और एल्युमिनियम का सीधा जोड़ न लगाएं: तांबे और एल्युमिनियम के नंगे तारों को कभी आपस में सीधे ट्विस्ट करके न जोड़ें। इससे केमिकल रिएक्शन (Galvanic Action) होता है और जोड़ हमेशा काला पड़कर जल जाता है। जोड़ने के लिए हमेशा कनेक्टर या थिम्बल (Lug) का इस्तेमाल करें।

​साइज का नियम: एल्युमिनियम की करंट ले जाने की क्षमता कॉपर से कम होती है। इसलिए जहां 4mm का कॉपर तार लगता है, वहां अगर एल्युमिनियम लगाना हो तो कम से कम 6mm या 10mm का तार लगाना पड़ता है।

​ISI मार्क और आर्मर्ड केबल: बाहर पोल से आने वाली लाइन के लिए हमेशा काली पीवीसी वाली XLPE आर्मर्ड एल्युमिनियम केबल ही खरीदें।

​हमारा निष्कर्ष और सलाह:

​घर के बाहर पोल से मीटर तक और सब-मेन लाइन के लिए मोटा एल्युमिनियम केबल लगाना सबसे किफायती और सही फैसला है।

​लेकिन घर की दीवारों के अंदर स्विच बोर्ड, एसी, गीजर और लाइट-पंखों के लिए कभी भी पैसे बचाने के चक्कर में एल्युमिनियम न लगाएं—अंदर हमेशा 100% शुद्ध कॉपर FRLS तार ही इस्तेमाल करें।

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