घर में सही Earthing कैसे करें: केमिकल अर्थिंग vs कोयला-नमक अर्थिंग में कौन सी सबसे बेस्ट है?
अक्सर लोग घर बनाते समय पेंट, टाइल्स और महंगे झूमर पर तो खुलकर खर्च करते हैं, लेकिन जब बात अर्थिंग (Earthing) की आती है तो इसे गैर-ज़रूरी समझकर छोड़ देते हैं या फिर नाममात्र का एक पतला तार ज़मीन में गाड़ देते हैं।
गीजर, कूलर या वाशिंग मशीन छूने पर आने वाला हल्का झनझनाहट भरा करंट, बिजली कड़कने पर महंगे टीवी और एसी के मदरबोर्ड का उड़ जाना—ये सब खराब अर्थिंग का ही नतीजा होते हैं।
घर के लिए सही अर्थिंग कैसे की जाती है और आज के समय में केमिकल अर्थिंग और पुरानी कोयला-नमक अर्थिंग में कौन सा तरीका सबसे बेहतर है? आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
1. घर में सही अर्थिंग होना क्यों अनिवार्य है?
मानव जीवन की सुरक्षा: जब किसी उपकरण का अंदरूनी फेज तार कटकर उसकी लोहे की बॉडी से छू जाता है, तो प्रॉपर अर्थिंग उस पूरे लीकेज करंट को तुरंत ज़मीन में भेज देती है और छूने वाले इंसान को करंट नहीं लगता।
महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान का बचाव: इन्वर्टर एसी, स्मार्ट टीवी, कंप्यूटर और फ्रिज के संवेदनशील पीसीबी (PCB) सर्किट को हाई वोल्टेज स्पाइक्स से बचाती है।
आकाशीय बिजली (Lightning) से सुरक्षा: छत पर लगे सोलर पैनल और बिल्डिंग को आंधी-तूफान के समय सुरक्षित रखती है।
2. पुरानी कोयला-नमक अर्थिंग (Traditional Earthing) के फायदे और कमियां
यह दशकों से इस्तेमाल होने वाला पारंपरिक तरीका है। इसमें 8-10 फीट गहरा गड्ढा खोदकर तांबे या जीआई (GI) की प्लेट डाली जाती है और उसके चारों तरफ नमक व चारकोल (कोयला) की परतें बिछाई जाती हैं।
फायदा: सामान स्थानीय बाज़ार में आसानी से मिल जाता है।
कमियां:
नमक की वजह से ज़मीन के अंदर मौजूद कॉपर या जीआई प्लेट में बहुत जल्दी जंग (Corrosion) लग जाता है और 2-3 साल में प्लेट गल जाती है।
गर्मियों में जब ज़मीन सूखती है, तो अर्थिंग काम करना बंद कर देती है और इसमें बार-बार पाइप से पानी डालना पड़ता है।
इसकी लाइफ मुश्किल से 3 से 5 साल होती है।
3. आधुनिक केमिकल अर्थिंग (Chemical Earthing / BFC Compound) क्यों बेस्ट है?
आज के आधुनिक मकानों, कमर्शियल बिल्डिंग्स और सोलर प्रोजेक्ट्स में सिर्फ केमिकल अर्थिंग ही की जाती है। इसमें एक कॉपर-बॉन्डेड या जीआई इलेक्ट्रोड रॉड के चारों तरफ बेंटोनाइट/कार्बन-आधारित BFC (Back Fill Compound) केमिकल पाउडर भरा जाता है।
रखरखाव मुक्त (Maintenance Free): इसमें बार-बार पानी डालने का कोई झंझट नहीं होता। यह केमिकल आसपास की ज़मीन से नमी सोखकर खुद को गीला रखता है।
जंग-मुक्त और लंबी उम्र: इसमें नमक का इस्तेमाल नहीं होता, इसलिए रॉड गलती नहीं है और इसकी लाइफ 15 से 20 साल तक आराम से चलती है।
कम जगह में आसान फिटिंग: इसके लिए बहुत चौड़ा गड्ढा नहीं खोदना पड़ता; मात्र 4 से 6 इंच चौड़े बोर में रॉड और कंपाउंड डालकर अर्थिंग तैयार हो जाती है।
4. अर्थिंग करवाते समय 4 ज़रूरी सावधानियां
अर्थिंग वायर का साइज: अर्थिंग पिट से लेकर मेन डिस्ट्रीब्यूशन बॉक्स (MCB DB) तक कम से कम 2.5 sq mm या 4.0 sq mm का हरा (Green) कॉपर वायर ही लाएं।
स्विच बोर्ड में लूपिंग: घर के हर 3-पिन पावर सॉकेट के ऊपर वाले बड़े छेद में अर्थिंग का तार जुड़ा होना चाहिए।
सोलर पैनल और इनवर्टर के लिए अलग अर्थिंग: अगर घर पर 3kW या बड़ा सोलर सिस्टम लगा है, तो सोलर स्ट्रक्चर और लाइटनिंग अरेस्टर (LA) के लिए सेपरेट 2 केमिकल अर्थिंग पिट बनवाएं।
रेजिस्टेंस चेक (Ohm Value): अर्थिंग पूरी होने के बाद इलेक्ट्रीशियन के अर्थ टेस्टर (Earth Tester) से चेक करवाएं। एक अच्छे घरेलू अर्थिंग का मान 2 से 3 Ohms से कम होना चाहिए।
हमारा निष्कर्ष और सलाह:
नया घर बनवाते समय बार-बार पानी डालने और प्लेट गलने की झंझट से बचने के लिए केमिकल अर्थिंग (Chemical Earthing) ही करवाएं।
मात्र ₹2,500 से ₹3,500 के खर्च में एक अच्छी 2 से 3 मीटर की कॉपर-बॉन्डेड रॉड और 25 किलो का केमिकल बैग आपके पूरे परिवार को करंट से और लाखों के बिजली उपकरणों को हमेशा के लिए सुरक्षित कर देता है।

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