घर में अर्थिंग (Earthing) क्यों ज़रूरी है? जानिए खराब अर्थिंग से करंट, उपकरण जलना और भारी बिजली बिल का सच


 ​नया मकान बनाते समय लोग दीवारों की फिनिशिंग, महंगे स्विच और सीलिंग लाइट्स पर लाखों रुपये खर्च करते हैं, लेकिन जब इलेक्ट्रीशियन अर्थिंग का गड्ढा खोदने और कॉपर/केमिकल अर्थिंग रॉड लगाने की बात करता है, तो अक्सर लोग पैसे बचाने के चक्कर में कहते हैं—"अर्थिंग की क्या ज़रूरत है, दो तार (फेज़ और न्यूट्रल) से तो सब चलता ही है!"

​लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिना अर्थिंग के आपका लाखों का घर, कीमती इलेक्ट्रॉनिक्स और आपके परिवार की जान हर समय 220V के जानलेवा खतरे में रहती है?

​आइए आसान भाषा में समझते हैं कि घर में सही अर्थिंग क्यों ज़रूरी है और इसके न होने से क्या-क्या नुकसान होते हैं।

​1. अर्थिंग न होने पर होने वाले 4 बड़े नुकसान

​उपकरणों की बॉडी में करंट आना:

फ्रिज का दरवाज़ा छूते ही, कूलर की जाली पकड़ते ही, वाशिंग मशीन या गीज़र के नल से हल्का झटका (Shock) लगना अर्थिंग न होने का सबसे पहला लक्षण है।

​इन्वर्टर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के कार्ड जलना:

LED टीवी, इन्वर्टर, फ्रिज और एसी में लगे आधुनिक इनवर्टर मदरबोर्ड्स (PCB) बहुत संवेदनशील होते हैं। अर्थिंग न होने पर न्यूट्रल में लीकेज वोल्टेज आता है, जिससे ये महंगे सर्किट तुरंत जल जाते हैं।

​आकाशीय बिजली (Lightning Surge) का खतरा:

बारिश के मौसम में आकाशीय बिजली का हाई-वोल्टेज झटका सीधे घर के मेन बोर्ड और मीटर में घुस जाता है, जिससे मीटर और सारे उपकरण एक साथ फुंक जाते हैं।

​बिजली बिल में बढ़ोतरी (Current Leakage):

जब लीकेज करंट को ज़मीन में जाने का रास्ता नहीं मिलता, तो कई बार वह दीवारों में नमी के ज़रिये लीक होता रहता है, जिससे बिजली का मीटर बिना वजह तेज़ चलता है।

​2. 3-पिन प्लग में ऊपर वाला मोटा पिन क्यों होता है?

​अक्सर लोग 3-पिन प्लग का ऊपर वाला मोटा पिन काट देते हैं या उसमें माचिस की तीली डालकर 2-पिन सॉकेट में लगा देते हैं।

​ऊपर वाला मोटा और लंबा पिन सीधे अर्थिंग (Earth) का होता है।

​जब आप प्लग लगाते हैं, तो सबसे पहले अर्थिंग कनेक्ट होती है ताकि उपकरण में अगर कोई लीकेज करंट हो, तो वह छूने से पहले ही ज़मीन में चला जाए।

​3. घर के लिए कौन सी अर्थिंग सबसे बेस्ट है? (Traditional vs Chemical Earthing)

​पारंपरिक अर्थिंग (नमक और कोयला):

​इसमें तांबे की प्लेट, चारकोल और नमक का गड्ढा बनाया जाता है।

​कमजोरी: इसमें हर 2-3 महीने में पानी डालना पड़ता है और 2-3 साल में नमक-कोयले का असर खत्म हो जाता है।

​केमिकल / जेल अर्थिंग (आज का सबसे आधुनिक विकल्प):

​इसमें कॉपर-बॉन्डेड रॉड के साथ बेंटोनाइट / BFC केमिकल पाउडर का इस्तेमाल होता है।

​फायदे: इसमें बार-बार पानी डालने की ज़रूरत नहीं होती, यह 10 से 15 साल तक बिना मेंटेनेंस के काम करती है और हर मौसम में नमी बनाए रखती है।

​4. अपने घर की अर्थिंग कैसे चेक करें? (आसान टेस्ट)

​एक 100W का पीला फिलामेंट बल्ब और होल्डर लें।

​बल्ब का एक तार Phase (फेज़) में और दूसरा तार Neutral (न्यूट्रल) में लगाएं—बल्ब पूरा जलेगा।

​अब दूसरा तार न्यूट्रल से निकालकर Earth (ऊपर वाले मोटे होल) में लगाएं।

​यदि बल्ब उतनी ही तेज़ी से जल रहा है, तो आपकी अर्थिंग 100% सही है। अगर बल्ब धीमा जल रहा है या नहीं जल रहा, तो अर्थिंग खराब है।

​हमारा निष्कर्ष और सलाह:

​अर्थिंग कोई फालतू का खर्च नहीं, बल्कि आपके परिवार की सुरक्षा का "लाइफ इंश्योरेंस" है। नया मकान बनाते समय या रेनोवेशन के दौरान अच्छी क्वालिटी की कॉपर-कोटेड केमिकल अर्थिंग ज़रूर करवाएं और घर के हर थ्री-पिन बोर्ड में हरा (Green) अर्थिंग वायर अनिवार्य रूप से जुड़वाएं।

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