Diwali Electrical Safety & Load Guide: दिवाली पर एक ही सॉकेट से 10 लड़ियां चलाने के खतरे! जानिए एक्सटेंशन बोर्ड, ओवरलोड और आग से बचाव के 5 नियम
दिवाली की रात घर की हर दीवार, छत और बालकनी रोशनी से जगमगा उठती है। लेकिन इस खुशी के बीच सबसे बड़ी लापरवाही तब होती है जब लोग बालकनी या छत के एक छोटे से 6-एम्पीयर सॉकेट में 3-वे मल्टीप्लग लगाकर 10 से 15 लड़ियां, हैवी फोकस लाइट और झूमर एक साथ जोड़ देते हैं। नतीजा यह होता है कि कुछ ही घंटों में सॉकेट गर्म होकर पिघलने लगता है, दीवारों के अंदर के तार सुलग जाते हैं या एमसीबी बार-बार ट्रिप होने लगती है। कान्हा इलेक्ट्रिकल & सोलर (रसूलिया, नर्मदापुरम) के इस तकनीकी सुरक्षा गाइड में जानिए कि दिवाली पर बिना किसी खतरे के सेफ लाइटिंग कैसे करें। 1. दिवाली लाइटिंग में होने वाली 3 सबसे खतरनाक गलतियां 1. 'डेज़ी चेनिंग' (Daisy Chaining: लड़ी के पीछे लड़ी जोड़ना) अधिकांश लड़ियों के पीछे एक फीमेल सॉकेट दिया होता है। लोग पहली लड़ी के पीछे दूसरी, दूसरी के पीछे तीसरी जोड़ते चले जाते हैं। इससे पहली लड़ी के शुरुआती पतले तार पर पूरे 10 लड़ियों का करंट आ जाता है, जिससे वह तार गर्म होकर जल जाता है। 2. घटिया लोकल एक्सटेंशन बोर्ड का उपयोग सड़क किनारे मिलने वाले ₹100 वाले एक्सटे...