​नक्शा, फायर NOC और टैक्स सब अनिवार्य, तो मकानों के लिए 'इलेक्ट्रिकल सेफ्टी ऑडिट' क्यों नहीं? इंदौर हादसे के बाद उठे बड़े सवाल!

 


​अगर आप शहर में अपना घर बनाने जा रहे हैं, तो नियमों की एक लंबी फेहरिस्त आपका इंतज़ार करती है:

  1. ​नगर पालिका या टीएनसीपी (TNCP) से इंजीनियर का नक्शा पास करवाइए।
  2. ​वॉटर हार्वेस्टिंग (छत के पानी को ज़मीन में उतारने) का हलफनामा दीजिए।
  3. ​बहुमंजिला या कमर्शियल है तो फायर ब्रिगेड से 'फायर सेफ्टी एनओसी' (Fire NOC) लीजिए।
  4. ​सीवेज और कचरा प्रबंधन के नियम पूरे कीजिए।

​लेकिन उस एक चीज़ के बारे में कोई नहीं पूछता, जिसके कारण देश में 70% से अधिक आगजनी की घटनाएं होती हैं—आपके घर की इंटरनल इलेक्ट्रिकल वायरिंग की सुरक्षा और फिटनेस!

​इंदौर में हाल ही में घर के अंदर ईवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल) चार्जिंग के दौरान हुए शॉर्ट सर्किट और ब्लास्ट ने जिस तरह हंसते-खेलते परिवार और आशियाने को राख के ढेर में बदल दिया, उसने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या अब समय नहीं आ गया है कि बिजली कनेक्शन चालू करने से पहले घर के 'इलेक्ट्रिकल सेफ्टी अप्रूवल' को कानूनन अनिवार्य किया जाए?

​1. नक्शे में सब कुछ है, बस 'वायरिंग लेआउट' नदारद है!

​आज एक आम आदमी जब 50 लाख या 1 करोड़ का घर बनाता है, तो आर्किटेक्ट एलिवेशन, बेडरूम साइज और टाइल्स का डिज़ाइन तो शानदार बना देता है, लेकिन 95% घरों में इलेक्ट्रिकल लोड कैलकुलेशन ड्राइंग नाम की कोई चीज़ नहीं होती।

  • ​किस कमरे में कितना एम्पीयर लोड आएगा?
  • ​एसी, गीज़र और ईवी चार्जिंग के लिए कौन सा डेडिकेटेड सर्किट होगा?
  • ​मुख्य बोर्ड पर लोड डिस्ट्रीब्यूशन तीनों फेजों में बराबर है या नहीं? यह सब कुछ लोकल मिस्त्री या ठेकेदार के अंदाज़े (रफ एस्टिमेट) पर छोड़ दिया जाता है।

​2. बिजली विभाग मीटर तो लगाता है, पर अंदर की जांच क्यों नहीं?

​बिजली कंपनियों का काम केवल खंभे से मीटर तक केबल खींचने और हर महीने बिल भेजने तक सीमित रह गया है।

मीटर के आगे दीवार के अंदर क्या लग रहा है—

  • ​क्या तार ISI मार्का और सही गेज (Square mm) का है?
  • ​क्या वहां RCCB (अवशिष्ट धारा ब्रेकर) लगा है जो करंट या लीकेज होते ही 30 मिली-सेकंड में ट्रिप हो जाए?
  • ​क्या केमिकल अर्थिंग का रेजिस्टेंस 2 से 5 ओम के सुरक्षित दायरे में है? इसकी कोई जांच (Audit) नहीं होती। जब तक हादसा नहीं होता, किसी को परवाह नहीं होती।

​3. भारी लोड और आधुनिक गैजेट्स: पुराने तरीके अब जानलेवा हैं

​आज से 20 साल पहले घर का लोड केवल 2-4 पंखे, बल्ब और एक टीवी तक सीमित था।

आज एक सामान्य घर में:

  • ​2-3 इन्वर्टर एसी (AC)
  • ​2000 वॉट का गीज़र
  • ​माइक्रोवेव, इंडक्शन चूल्हा
  • ​और सबसे संवेदनशील—इलेक्ट्रिक दोपहिया/कार की फास्ट चार्जिंग!

​ईवी (EV) चार्जिंग कोई सामान्य मोबाइल चार्जिंग नहीं है। यह लगातार कई घंटों तक 15-16 एम्पीयर का भारी करंट खींचती है। अगर दीवार के अंदर सॉकेट लोकल हुआ, तार का साइज पतला हुआ या न्यूट्रल ढीला (Loose Contact) रहा, तो तार का तापमान 100 डिग्री पार कर जाता है। परिणाम? इंदौर जैसा भयानक अग्निकांड!

​क्या होना चाहिए सरकारी और नीतिगत समाधान?

​कान्हा इलेक्ट्रिकल का यह स्पष्ट मानना है कि यदि हमें अपने शहरों और परिवारों को इन हादसों से बचाना है, तो सरकार, विद्युत नियामक आयोग और स्थानीय प्रशासन को ये 3 कदम तुरंत उठाने चाहिए:

  1. ​अनिवार्य इलेक्ट्रिकल फिटनेस सर्टिफिकेट: जिस तरह नई गाड़ी की फिटनेस होती है, उसी तरह किसी भी नए मकान का बिजली कनेक्शन स्थायी करने से पहले एक सर्टिफाइड इलेक्ट्रिकल इंजीनियर या लाइसेंसी सुपरवाइज़र का सेफ्टी कंप्लीशन सर्टिफिकेट अनिवार्य हो।
  2. ​RCCB और प्रॉपर अर्थिंग की फिजिकल जांच: कनेक्शन देने से पहले मीटर इंस्पेक्टर सिर्फ मीटर न लगाए, बल्कि यह जांचे कि घर में अर्थ लीकेज के लिए 30mA की RCCB लगी है या नहीं। अगर नहीं है, तो कनेक्शन रोका जाए।
  3. ​ईवी चार्जिंग के लिए अलग से डेडिकेटेड पॉइंट: घर में ईवी चार्जिंग के लिए मीटर से अलग से सीधी केबल, एमसीबी और फायर-प्रूफ बॉक्स का नियम बने।

​कान्हा इलेक्ट्रिकल की अपील:

​"नियम बने या न बने, सरकार जांचे या न जांचे... लेकिन उस घर में आपका अपना परिवार रहता है। टाइल्स और फॉल्स सीलिंग में 50 हज़ार कम खर्च कर लीजिए, लेकिन सही तार, सही ब्रेकर (RCCB) और सही अर्थिंग में 10 हज़ार रुपये बचाने की भूल कभी मत कीजिए। सुरक्षा नियमों से नहीं, आपकी सजगता से शुरू होती है।"

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