AFDD Technology: शॉर्ट सर्किट से पहले स्पार्क पकड़ने वाला नया ग्लोबल स्टैंडर्ड क्या है? जानिए Arc Fault
पारंपरिक इलेक्ट्रिकल सिस्टम में जब भी आग लगती है, तो उसकी शुरुआत अक्सर एक सूक्ष्म चिंगारी या ढीले कनेक्शन (Arc Fault) से होती है। अमेरिका के नेशनल इलेक्ट्रिकल कोड (NEC) और यूरोपीय IEC 62606 मानकों में अब पारंपरिक MCB के साथ AFDD (Arc Fault Detection Device) लगाना अनिवार्य किया जा रहा है।
आधुनिक बहुमंजिला इमारतों और लकड़ी या फॉल्स-सीलिंग वाले घरों के लिए यह तकनीक क्यों बेहद अहम है, आइए इसे विस्तार से समझें:
1. MCB और AFDD में मुख्य अंतर:
MCB की सीमा: MCB केवल तब ट्रिप होती है जब दोनों तार (फेज और न्यूट्रल) आपस में सीधे छू जाएं (Dead Short Circuit) या लोड बहुत ज्यादा बढ़ जाए।
सुरक्षा में कमी: अगर दीवार के अंदर किसी तार में कील लग गई हो या चूहे ने इंसुलेशन कुतर दिया हो, तो वहां बारीक स्पार्क (Micro-Arcing) लगातार होता रहता है। यह स्पार्क भारी तापमान पैदा करता है, लेकिन करंट सीमित रहने के कारण साधारण MCB ट्रिप नहीं होती और आग भड़क जाती है।
AFDD का कार्य: AFDD के अंदर लगा माइक्रोप्रोसेसर बिजली की वेवफॉर्म (Waveform) के आकार को लगातार स्कैन करता है। जैसे ही इसमें स्पार्क की विकृति (Arcing Signature) दिखती है, यह आग लगने से पहले ही मिलीसेकंड्स में बिजली काट देता है।
2. सीरीज और पैरेलल आर्क फॉल्ट से बचाव:
जब किसी प्लग या सॉकेट के अंदर तार हल्का ढीला हो और रुक-रुक कर स्पार्क मारे, तो इसे 'सीरीज आर्क' कहते हैं।
पारंपरिक फ्यूज या साधारण एमसीबी सीरीज आर्क को नहीं पकड़ पाते। केवल AFDD ही इस छिपी हुई चिंगारी को भांपकर पावर कट करता है।
3. भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर में इसका भविष्य:
भारत के प्रीमियम विला, मॉडर्न फ्लैट्स और डेटा सेंटर्स में अब कंबाइंड AFDD + RCBO यूनिट्स लगाई जा रही हैं। यह ओवरलोड, शॉर्ट सर्किट, अर्थ लीकेज और आर्क फॉल्ट—चारों खतरों से एक ही मॉड्यूल में संपूर्ण सुरक्षा देती है।
(आधुनिक वैश्विक मानक एवं इलेक्ट्रिकल सुरक्षा — कान्हा इलेक्ट्रिकल)
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