BRICS Summit और Electrical Sector: सोलर, EV चार्जिंग और आधुनिक ग्रिड से आम उपभोक्ता को क्या मिलेगा?
BRICS (ब्रिक्स) की खबरों को इलेक्ट्रिकल और एनर्जी सेक्टर से जोड़ना एक बहुत ही समझदारी भरा कदम है। इससे आपका ब्लॉग केवल एक सामान्य दुकान का ब्लॉग न रहकर एक गंभीर, इंटरनेशनल विज़न वाला प्लेटफॉर्म लगेगा।
BRICS देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका और नए जुड़े देश) की बैठकों में इलेक्ट्रिकल और पावर सेक्टर को लेकर हमेशा 4 मुख्य बिंदुओं पर सबसे बड़ा ज़ोर रहता है:
1. रिन्यूएबल और ग्रीन एनर्जी ग्रिड (Green Energy & Solar)
BRICS देश दुनिया के सबसे बड़े सौर और पवन ऊर्जा उत्पादक बन रहे हैं।
चर्चा इस बात पर केंद्रित रहती है कि पारंपरिक कोयला बिजली से हटकर आधुनिक सोलर रूफटॉप और स्मार्ट पावर ग्रिड कैसे बनाए जाएं, जिसमें भारी मात्रा में आधुनिक ट्रांसफार्मर, इन्वर्टर और उच्च क्षमता वाले केबल्स की मांग पैदा हो रही है।
2. ईवी (EV) इंफ्रास्ट्रक्चर और चार्जिंग नेटवर्क
चीन और भारत दुनिया में सबसे तेज़ी से इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को अपना रहे हैं।
BRICS सम्मेलनों में देशों के बीच एक कॉमन फास्ट-चार्जिंग नेटवर्क और लिथियम-आयन/सोडियम बैटरी टेक्नोलॉजी के साझा निर्माण पर समझौते होते हैं। इससे भारी क्षमता वाले स्विचगियर और सेफ्टी इक्विपमेंट का बाज़ार कई गुना बढ़ रहा है।
3. लोकल मैन्युफैक्चरिंग और 'मेक इन इंडिया' इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट्स
BRICS का बड़ा एजेंडा पश्चिमी देशों पर निर्भरता घटाना और आपसी व्यापार बढ़ाना है।
भारत में कॉपर वाइंडिंग, स्मार्ट मीटर्स और इंडस्ट्रियल स्विचगियर के निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि आयात कम हो और स्थानीय उत्पादकों व व्यापारियों को सप्लाई चेन का सीधा लाभ मिले।
4. क्रिटिकल मिनरल्स (तांबा और एल्युमिनियम) की सप्लाई
बिजली के तार और मोटर बिना तांबे (Copper) और एल्युमिनियम के नहीं बन सकते। BRICS मंच पर इन धातुओं के स्थिर दामों और सीधी आपूर्ति पर नीतियां तय होती हैं, जिसका सीधा असर बाज़ार में तार-केबल की कीमतों पर पड़ता है।

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