सोलर पैनल लगाना आसान, पर 25 साल सर्विस कौन देगा? जानिए इन्वर्टर एरर, DC स्पार्किंग और सोलर रिपेयरिंग की वो सावधानियां जो कोई नहीं बताता
आज हर कोई छत पर सोलर पैनल लगवा रहा है। सरकार की सब्सिडी योजनाएं हैं, बड़ी-बड़ी कंपनियाँ हैं और 25 साल की वारंटी के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सोलर लगाने वाली कंपनी 2-3 साल बाद जब सिस्टम बंद पड़ेगा, तब सर्विस देने आएगी?
कड़वा सच यह है कि छत पर पैनल कसना तो कोई भी सीख लेता है, लेकिन जब इन्वर्टर में फॉल्ट आता है या जनरेशन घटती है, तब ग्राहक कस्टमर केयर के चक्कर काटते रह जाते हैं।
सोलर सिस्टम में सबसे ज्यादा क्या खराब होता है?
• ऑन-ग्रिड / हाइब्रिड इन्वर्टर एरर: इन्वर्टर में अचानक लाल बत्ती (Red Fault Light) जलना, डिस्प्ले पर 'Grid Voltage Out of Range' या 'Isolation Fault' का एरर कोड आना।
• लोकल MC4 कनेक्टर्स का पिघलना: धूप में खुले पड़े सस्ते कनेक्टर्स में स्पार्किंग होती है, जिससे डीसी (DC) वायर जल जाते हैं और करंट बनना रुक जाता है।
• DCDB और SPD का उड़ना: आकाशीय बिजली या ग्रिड के हाई-वोल्टेज झटके से सर्ज प्रोटेक्शन डिवाइस (SPD) जल जाती है।
• अर्थिंग का सूख जाना: केमिकल अर्थिंग सूखने से इन्वर्टर बॉडी में करंट उतरने लगता है और सिस्टम बार-बार ट्रिप होता है।
अनाड़ी इलेक्ट्रीशियन से सोलर रिपेयरिंग क्यों न कराएं?
• डीसी करंट (DC Arc) का खतरा: 3kW से 5kW के सोलर सिस्टम में 300V से 600V का डायरेक्ट करंट दौड़ता है, जो साधारण 220V AC बिजली से कहीं ज्यादा जानलेवा होता है।
• धूप में पैनल बंद नहीं होते: मेन स्विच गिराने के बाद भी जब तक धूप है, पैनल करंट बनाते रहते हैं। बिना सेफ्टी टूल्स के तार छूना खतरनाक है।
सोलर का डॉक्टर कौन?
सोलर कोई 'लगाओ और भूल जाओ' वाला उपकरण नहीं है। इसे समय पर सर्विसिंग, डीसी वोल्टेज टेस्टिंग और पैनल क्लीनिंग की जरूरत होती है। यदि आपका सोलर सिस्टम कम यूनिट बना रहा है या इन्वर्टर में एरर आ रहा है, तो हमेशा ट्रेंड सोलर टेक्नीशियन से ही जांच कराएं।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें