​लाखों का इंटीरियर और ₹3000 की अर्थिंग गायब? नया मकान या रेनोवेशन कराते समय सबसे बड़ी चूक!

​नया मकान बनाते समय लोग इटैलियन टाइल्स, प्रीमियम मॉड्यूलर स्विच, शानदार फॉल्स सीलिंग और महंगे पेंट पर पानी की तरह पैसा बहाते हैं। 40 से 50 लाख रुपये का बजट हँसते-हँसते तय हो जाता है।
​लेकिन इसी आलीशान आशियाने में जब ज़मीन के भीतर एक मानक और सुरक्षित 'अर्थिंग' (Earthing) के लिए 3 से 4 हज़ार रुपये की बात आती है, तो अधिकांश लोग—और अफ़सोस की बात यह है कि कई बार उनके ठेकेदार और इलेक्ट्रीशियन भी—इसे गैर-जरूरी खर्च समझकर टाल देते हैं।
​नतीजा? गृहप्रवेश के कुछ ही महीनों बाद समस्याएं शुरू हो जाती हैं।
Importance of Chemical Earthing in Modern House Wiring and Renovation


​1. आज के आधुनिक घर में अर्थिंग इतनी अनिवार्य क्यों है?
​आज से 20-25 साल पहले के घरों में केवल बल्ब, साधारण पंखा और एक टीवी हुआ करता था। लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है:
​इन्वर्टर टेक्नोलॉजी वाले उपकरण: आज हर घर में इन्वर्टर एसी, बीएलडीसी पंखे और स्मार्ट रेफ्रिजरेटर हैं। इनके भीतर बेहद संवेदनशील माइक्रो-कंट्रोलर और पीसीबी (PCB Board) लगे होते हैं।
​लीकेज वोल्टेज का खतरा: बिना सही ग्राउंडिंग के इन उपकरणों की बॉडी पर स्टैटिक और लीकेज वोल्टेज जमा होता रहता है, जो सीधे पीसीबी को जला देता है। बाद में कंपनी वाले "पावर सर्ज / नो अर्थिंग" कहकर वारंटी देने से मना कर देते हैं।
​इन्वर्टर और यूपीएस की कार्यप्रणाली: कमजोर अर्थिंग होने पर आधुनिक इनवर्टर बार-बार 'Fault' या 'Error' दिखाने लगते हैं और बैटरी चार्जिंग पर असर पड़ता है।
​2. पुराने मकानों के रेनोवेशन में सबसे बड़ा सिरदर्द
​अक्सर पुराने मकानों का नवीनीकरण (Renovation) कराते समय लोग दीवारों में नई कंसील्ड पाइपिंग करवाकर 3-वायर (फेज, न्यूट्रल और हरा अर्थ तार) खिंचवा तो लेते हैं, लेकिन बाहर ज़मीन में कोई एक्टिव अर्थिंग नहीं होती।
​हरी तार केवल दीवारों के अंदर लूप बनकर रह जाती है। जब गीज़र, वॉशिंग मशीन या आरओ चालू होता है, तो नलों और सिंक में हल्का करंट (Tingling Sensation) महसूस होने लगता है। बाद में टाइल्स और कंक्रीट का फर्श तुड़वाकर अर्थिंग का गड्ढा खुदवाना एक बहुत बड़ा और महंगा झंझट बन जाता है।
​3. इंजीनियर और इलेक्ट्रीशियन इस पर जोर क्यों नहीं देते?
​दिखाई न देने वाला काम: इंटीरियर की चमक-धमक आंखों के सामने दिखती है, जबकि अर्थिंग ज़मीन के 8-10 फीट नीचे छिप जाती है। जो चीज़ दिखती नहीं, उस पर लोग खर्च करने में हिचकिचाते हैं।
​बजट का डर: इलेक्ट्रीशियन अक्सर यह सोचकर अर्थिंग का खुलकर ज़िक्र नहीं करते कि कहीं मकान मालिक को इलेक्ट्रिकल का कुल कोटेशन बहुत ज़्यादा न लगने लगे।
​"बाद में कर लेंगे" वाली मानसिकता: यह सोचना कि जब एसी या हैवी लोड आएगा तब गड्ढा खुदवा लेंगे—सबसे बड़ी भूल है, क्योंकि तब तक मकान के चारों तरफ पेवर ब्लॉक या कंक्रीट की ढलाई हो चुकी होती है।
​4. सही प्लानिंग के 3 नियम
​फाउंडेशन के समय ही बोर/गड्ढा करें: जब मकान की नींव या प्लिंथ लेवल का काम चल रहा हो, तभी एक 2-इंच या 6-इंच का अर्थिंग बोर कराकर कॉपर बॉन्डेड रॉड और केमिकल कंपाउंड डलवा देना सबसे सस्ता और आसान पड़ता है।
​सस्ते नमक-कोयले से बचें: नए दौर के उपकरणों के लिए 1 से 2 ओम का स्थिर रेजिस्टेंस चाहिए, जो केवल मेंटेनेंस-फ्री केमिकल अर्थिंग से ही 15-20 साल तक निरंतर मिल सकता है।
​अर्थ-टू-न्यूट्रल वोल्टेज चेक करें: घर में शिफ्ट होने से पहले मल्टीमीटर से न्यूट्रल और अर्थ के बीच का वोल्टेज ज़रूर नपवाएं। यह हमेशा 2V से कम होना चाहिए।
​निष्कर्ष:
घर केवल खूबसूरत दिखने से सुरक्षित नहीं बनता, उसकी असली सुरक्षा ज़मीन की गहराई में छिपी अर्थिंग से तय होती है। लाखों के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और परिवार की जान की सुरक्षा के लिए शुरुआत में ही अर्थिंग पर ध्यान देना कोई खर्च नहीं, बल्कि सबसे समझदारी भरा निवेश है।
​(विद्युत सुरक्षा, आधुनिक अर्थिंग सिस्टम और तकनीकी सलाह पर एक जनहित समीक्षा)

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