बिजली कटने पर जनरेटर या इनवर्टर पर ऑटो-शिफ्ट कैसे करें? जानिए Phase Selector का सही उपयोग
जिन घरों, दुकानों या वर्कशॉप्स में बिजली जाने पर जनरेटर चलाया जाता है, या जहाँ थ्री-फेज़ (3-Phase) बिजली कनेक्शन है, वहाँ अक्सर सबसे बड़ी समस्या बिजली के सोर्स को बदलने (Switching) की आती है। पुरानी स्टाइल का भारी-भरकम चाकू वाला (Knife type) हैंडल चेंजओवर न सिर्फ स्पार्किंग करता है, बल्कि उसमें करंट लगने का भी खतरा रहता है।
आजकल बाज़ार में DIN-Rail मॉड्यूलर चेंजओवर, ऑटोमैटिक चेंजओवर (Automatic Transfer Switch - ATS) और ऑटोमैटिक फेज़ सेलेक्टर आ चुके हैं। आइए जानते हैं कि आपके सिस्टम के लिए कौन सा चेंजओवर सबसे सुरक्षित और आसान है।
1. चेंजओवर स्विच के विभिन्न प्रकार (तुलना चार्ट)
| प्रकार | ऑपरेशन मोड | सबसे बड़ा फायदा | उपयुक्त स्थान |
|---|---|---|---|
| मॉड्यूलर चेंजओवर (MCB Type) | मैनुअल (I - 0 - II नॉब) | कॉम्पैक्ट साइज, सीधे DB बॉक्स में MCB के साथ फिट हो जाता है। | सामान्य घर (मेन ग्रिड से इनवर्टर या छोटा जेनसेट बदलने हेतु)। |
| ऑटोमैटिक चेंजओवर (ACCLL / ATS) | पूरी तरह ऑटोमैटिक | बिजली जाते ही खुद जनरेटर पर शिफ्ट होता है; बिजली आते ही बिना झटका दिए वापस ग्रिड पर आ जाता है। | अस्पताल, शोरूम, वर्कशॉप और बड़े रिहायशी बंगले। |
| ऑटोमैटिक फेज़ सेलेक्टर (APS) | सेंसिंग आधारित ऑटोमैटिक | थ्री-फेज़ में से कोई एक फेज़ कटने पर चालू फेज़ से सिंगल फेज़ लोड को जोड़ देता है। | थ्री-फेज़ घरेलू कनेक्शन जहाँ अक्सर एक फेज़ चला जाता है। |
2. थ्री-फेज़ घरों के लिए 'ऑटोमैटिक फेज़ सेलेक्टर
' क्यों है वरदान?
कई बार खंभे से थ्री-फेज़ लाइन में से केवल 'R' या 'Y' फेज़ उड़ जाता है। इसके चलते घर के कुछ कमरों में अंधेरा छा जाता है जबकि बाकी घर में लाइट रहती है।
- पहले इसके लिए रोटरी स्विच (Rotary Switch) को हाथ से घुमाना पड़ता था, जिससे वोल्टेज स्पार्क होती थी।
- ऑटो फेज़ सेलेक्टर माइक्रो-कंट्रोलर से वोल्टेज नापता है। जैसे ही किसी फेज़ की वोल्टेज 160V से नीचे जाती है, वह तुरंत उपलब्ध स्वस्थ (Healthy) फेज़ पर लोड को मिली-सेकंड में शिफ्ट कर देता है, जिससे घर में कभी अंधेरा नहीं होता।
3. चेंजओवर वायरिंग में सबसे बड़ी सावधानी: न्यूट्रल मिक्सिंग
- 4-Pole (4P) चेंजओवर का ही उपयोग करें: थ्री-फेज़ सिस्टम में केवल तीनों फेज़ ही नहीं, बल्कि मेन लाइन और जनरेटर का न्यूट्रल भी अलग-अलग आइसोलेट होना चाहिए। 3-Pole चेंजओवर लगाने पर न्यूट्रल बैक-करंट मार सकता है।
- ओवरलैपिंग कॉन्टैक्ट्स से बचाव: हमेशा मेक-बिफोर-ब्रेक या ब्रेक-बिफोर-मेक प्रमाणित मैकेनिज्म वाले चेंजओवर लगाएं ताकि ग्रिड की बिजली और जनरेटर की बिजली कभी एक साथ आपस में न टकराएं।
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